क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत विवाह कैसे करें? पूरी कानूनी प्रक्रिया जानें क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872

Christian Marriage Act के तहत Court Marriage की पूरी प्रक्रिया

भारत में यदि दो क्रिश्चियन व्यक्ति विवाह करना चाहते हैं, तो उनका विवाह Christian Marriage Act, 1872 के अंतर्गत संपन्न किया जाता है। यह कानून विशेष रूप से क्रिश्चियन समुदाय के विवाह को नियंत्रित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि विवाह कानूनी रूप से वैध, सुरक्षित और मान्य हो। आज के समय में कई लोग Court Marriage के माध्यम से सरल और विधिक तरीके से विवाह करना पसंद करते हैं। Christian Marriage Act के अंतर्गत भी विवाह अधिकृत Marriage Registrar के समक्ष संपन्न किया जाता है और विवाह प्रमाणपत्र उसी दिन जारी किया जा सकता है, यदि सभी दस्तावेज पूर्ण हों।

Christian Marriage Act क्या है?

Christian Marriage Act, 1872 भारत में क्रिश्चियन विवाहों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इस अधिनियम के तहत दो बपतिस्मा प्राप्त क्रिश्चियन व्यक्तियों का विवाह विधिक रूप से पंजीकृत किया जाता है। इस कानून के अंतर्गत विवाह अधिकृत Marriage Registrar या चर्च में अधिकृत पादरी के माध्यम से संपन्न किया जा सकता है। Court Marriage के रूप में जब विवाह Registrar के समक्ष किया जाता है, तो पूरी प्रक्रिया सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होती है।

Christian Court Marriage के लिए पात्रता

Christian Marriage Act के अंतर्गत विवाह के लिए निम्न शर्तें आवश्यक हैं: • दोनों पक्ष क्रिश्चियन धर्म के हों • दोनों का बपतिस्मा (Baptism) हुआ हो • दोनों की आयु कानून के अनुसार वैध हो • विवाह स्वेच्छा से हो, किसी प्रकार का दबाव न हो • किसी भी पक्ष का पूर्व विवाह कानूनी रूप से समाप्त हो चुका हो (यदि लागू हो) Registrar विशेष रूप से यह सुनिश्चित करता है कि विवाह पूरी तरह स्वेच्छा से किया जा रहा है।

आवश्यक दस्तावेज

Christian Court Marriage के लिए सामान्यतः निम्न दस्तावेज आवश्यक होते हैं: • आधार कार्ड (पहचान प्रमाण) • पता प्रमाण • जन्म तिथि प्रमाण • पासपोर्ट साइज फोटो • तलाक डिक्री (यदि पूर्व विवाह हुआ हो) • विदेशी नागरिक होने पर पासपोर्ट एवं Marital Status Certificate यदि किसी एक पक्ष की नागरिकता विदेशी है, तो संबंधित दूतावास द्वारा जारी वैवाहिक स्थिति प्रमाणपत्र अनिवार्य होता है।

Christian Marriage Registration की प्रक्रिया

Christian Marriage Act के अंतर्गत Court Marriage की प्रक्रिया सामान्यतः निम्न प्रकार होती है: सबसे पहले आवेदन पत्र एवं आवश्यक हलफनामे तैयार किए जाते हैं। सभी दस्तावेजों की Self Attestation की जाती है। इसके पश्चात सरकारी पोर्टल पर Appointment निर्धारित होती है। Appointment की पुष्टि मोबाइल और ईमेल पर प्राप्त हो जाती है। निर्धारित तिथि पर दोनों पक्ष दो गवाहों के साथ Marriage Registrar के समक्ष उपस्थित होते हैं। Registrar दोनों पक्षों से नाम, पता, पिता का नाम, राष्ट्रीयता आदि की पुष्टि करता है। विशेष रूप से यह पूछा जाता है कि विवाह स्वेच्छा से हो रहा है या नहीं। संतुष्ट होने के बाद Registrar विवाह संपन्न करता है और Marriage Certificate जारी कर देता है।

Marriage Certificate की वैधता

Christian Marriage Act के अंतर्गत जारी Marriage Certificate पूरे भारत में विधिक रूप से मान्य होता है। यह प्रमाणपत्र विदेशों में भी मान्य होता है और आवश्यकता पड़ने पर Apostille या Embassy Attestation के लिए उपयोग किया जा सकता है। विवाह प्रमाणपत्र को सरकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन सत्यापित भी किया जा सकता है।

Christian Marriage Act बनाम Special Marriage Act

अक्सर लोग Christian Marriage Act और Special Marriage Act के बीच भ्रमित हो जाते हैं। Christian Marriage Act केवल दो क्रिश्चियन व्यक्तियों पर लागू होता है। जबकि Special Marriage Act विभिन्न धर्मों के व्यक्तियों के बीच विवाह के लिए लागू होता है। Christian Marriage Act के अंतर्गत प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होती है और कई मामलों में उसी दिन प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है, जबकि Special Marriage Act में नोटिस अवधि आवश्यक होती है।

क्यों आवश्यक है सही विधिक मार्गदर्शन?

विवाह एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय है। यदि दस्तावेजों में त्रुटि हो या प्रक्रिया सही तरीके से न अपनाई जाए, तो भविष्य में कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। सही विधिक सलाह से: • दस्तावेज सही तरीके से तैयार होते हैं • प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होती • विवाह विधिक रूप से सुरक्षित रहता है • Marriage Certificate समय पर प्राप्त होता है Court Marriage और Christian Marriage Registration की प्रक्रिया को समझकर ही आगे बढ़ना उचित है।

निष्कर्ष

Christian Marriage Act, 1872 के अंतर्गत Court Marriage एक सरल, पारदर्शी और विधिक रूप से सुरक्षित प्रक्रिया है। यदि दोनों पक्ष पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो विवाह पंजीकरण सुचारू रूप से संपन्न किया जा सकता है। विवाह प्रमाणपत्र पूरे भारत और विदेशों में मान्य होता है तथा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रहता है। अधिक जानकारी एवं विधिक सहायता के लिए संपर्क करें: https://delhilawfirm.news helpline 9990649999, 9999889091